आभासी ब्रह्मांड – Sanskrit Shlok

अनन्तरंगे निहितं, अलिखितं लेखनैः।
ज्ञानस्य कोषः अमितः, किं तत्सत्यं वदाम्यहम्?॥

हिंगलिश स्लोक: Anantaramge nihitam, alikhitaṁ lekhanaih. Jñanasya koshaḥ amitaḥ, kim tatsatyam vadaamyaham?

हिन्दी अनुवाद: अनंत लोकों में छिपा हुआ, शास्त्रियों द्वारा अलिखित। ज्ञान का अथाह भण्डार, कौन-सा सत्य कहूँ?

पहेली का उत्तर: इंटरनेट।

Sanskrit Shlok का सार: श्लोक कुछ ऐसा वर्णन करता है जो अनंत क्षेत्रों में छिपा हुआ है – इंटरनेट की आभासी और असीम प्रकृति का जिक्र करता है। यह शास्त्रियों द्वारा अलिखित है, यह दर्शाता है कि यह भौतिक पाठ नहीं बल्कि एक डिजिटल माध्यम है। ज्ञान का असीम खजाना होने के नाते, यह श्लोक इंटरनेट की सच्चाई की बात करता है।

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