शाश्वत पहेली: आत्मा पर एक श्लोक पहेली

नवद्वारपुरी दीप्ता, नैव कुर्वन्न कारयन्।
निर्विकल्पं निराकारं, किं तत्सत्यं वदाम्यहम्?॥

हिंगलिश स्लोक: Navadwarapuri deepta, naiva kurvann karayan. Nirvikalpam niraakaram, kim tatsatyam vadaamyaham?

हिन्दी अनुवाद: यह शहर में नौ द्वारों से चमकता है, न तो आकर्षित करता है और न ही कारण बनता है।
बिना विविधता और बिना रूप के, मैं कौन सा सत्य बोलो?

पहेली का उत्तर: आत्मा।

सार: श्लोक कुछ ऐसा वर्णन करता है जो “नौ द्वार वाले शहर” में रहता है – मानव शरीर, जिसे अक्सर नौ उद्घाटन या “द्वार” के रूप में वर्णित किया जाता है। आत्मा की सारहीन और असंबद्ध प्रकृति का हवाला देते हुए, यह क्रिया नहीं करती है और न ही यह कार्य करती है। भिन्नता और रूप से रहित होने के कारण, श्लोक इस प्रकार आत्मा के सत्य की बात करता है।

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