मेघ रहस्य – Sanskrit Shlok

विकसन्नपि संकुचितं, जलदात्मकं विभो।
आकाशं पृथिवीं छायया, किं तत्सत्यं वदाम्यहम्?॥

हिंगलिश स्लोक: Vikasannapi sankuchitam, jaladatmakam vibho. Akasham prithiveem chhayaya, kim tatsatyam vadaamyaham?

हिन्दी अनुवाद: पानी के सार को मूर्त रूप देते हुए, विस्तारित होते हुए भी संकुचित। आकाश और पृथ्वी को छायांकित करता हूँ, मैं कौन सा सत्य कहो ?

पहेली का उत्तर: बादल।

Sanskrit Shlok का सार: श्लोक किसी ऐसी चीज का वर्णन करता है जो विस्तार कर रही है फिर भी सिकुड़ी हुई प्रतीत होती है, जो उस बादल का उल्लेख कर सकती है जो विशाल दिखाई देता है फिर भी संघनित लगता है। ऐसा कहा जाता है कि यह पानी के सार को ग्रहण करता है क्योंकि बादल जल वाष्प को ले जाते हैं। यह आकाश में चलने पर आकाश और पृथ्वी दोनों को छायादार बनाता है, इसलिए यह श्लोक मेघ की सच्चाई की बात करता है।

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