परिश्रम: सूरज सा चमकने के लिए

बिना परिश्रम कुछ पा सकता नहीं,
आलस्य मानव को कभी आगे बढ़ा सकता नहीं।

जहां सूरज की पहली किरण,
निहारे नदी की धारा।
बेहता है वहीं स्नेह और प्यार,
भरा है जीवन सारा।

Leave a comment