समय के सार को गले लगाते हुए

“वक्त हर किसी का पलटता है, ज़िंदगी उसी की रहती है, जो वक्त के साथ बदलता है।”

“वक्त वहीं ठहर जाता है, जहां हम खुद को खो देते हैं, जीवन की सच्चाई यही है, कि हम वक्त के साथ खुद को ढूंढते रहे।”

वक्त की धूप में खिलते हैं जीवन के फूल,
पल पल का सफर, बदलता रहता है दूर-दूर कोई छूल।
विचारों की लहरों में बहते हैं यादों के तारे,
चलते रहते हैं मनुष्य, न रुकता वक्त के पारे।

वक्त के आँगन में नाचते हैं हम रंग राचे,
उछलते तरानों में संग गूंजे धरती तारे।
खुशियों के संग गा दुःख के मीठे गाने,
जीवन के साथियों का होता है वक्त का संगाने।

“जब तक चलता है वक्त, जीने का मजा रहे,
दिल की हर धड़कन में, जीवन का संगीत रहे।”

“ज़िन्दगी की रफ़्तार के साथ जीने का आनंद लो,
अपने सपनों को पंख दे, ऊँचाईयों को पहुंच लो।”

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