वायु की छलबल: एक श्लोक पहेली – Sanskrit Shlok

स्वयं न स्थायते क्वचित्, अन्येषां गतिमाचरेत्।
अप्रतिहतगामिनी, किं तत्सत्यं वदाम्यहम्?॥

हिंगलिश स्लोक: Swayam na sthayate kvachit, anyesham gatimaacharet. Apratihatagaaminee, kim tatsatyam vadaamyaham?

हिन्दी अनुवाद: यह अपने आप स्थिर नहीं रहता, दूसरों को गति प्रदान करता है। निर्विघ्न विचरता है, मैं कौन-सा सत्य कहो?

पहेली का उत्तर: पवन या वायु।

Sanskrit Shlok का सार: यह श्लोक किसी ऐसी चीज का वर्णन करता है जो हमेशा गति में रहने वाली हवा का जिक्र करते हुए अपने आप स्थिर नहीं रहती है। यह अन्य चीजों को भी गति में रखता है, क्योंकि हवा पत्तियों, शाखाओं आदि को हिला सकती है। यह बिना किसी बाधा के बिना रुके चलती है। इस प्रकार, श्लोक हवा या हवा की सच्चाई की बात करता है।

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