अदृश्य रोशनी – Sanskrit Shlok

अन्तःस्थितं परं ज्योतिः, सर्वव्यापी न लक्ष्यते।
अप्रमेयमनन्तं च, किं तत्सत्यं वदाम्यहम्?॥

हिंगलिश स्लोक: Antahsthitam param jyotih, sarvavyapi na lakshyate. Aprameyamanantam cha, kim tatsatyam vadaamyaham?

हिन्दी अनुवाद: परम प्रकाश भीतर है, व्याप्त है, पर दिखाई नहीं पड़ता। अथाह और अनंत, मैं कौन सा सत्य बोलों?

पहेली का उत्तर: ईश्वर।

Sanskrit Shlok का सार: श्लोक किसी ऐसी चीज का वर्णन करता है जो एक आंतरिक, सर्वोच्च प्रकाश है, जो हर जगह मौजूद है फिर भी अनदेखी है। यह परमात्मा या ईश्वर की ओर इशारा करते हुए माप से परे और अनंत है। इस प्रकार, श्लोक परमात्मा या ईश्वर के सत्य की बात करता है।

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