अदृश्य पर्यवेक्षक: Sanskrit Shlok

अदृश्यं गृहित्री यत् तु दृश्यमेव विश्वसृत्।
अनादिनिधनं चेतनम्, किं तत्सत्यं वदाम्यहम्?॥

हिंगलिश स्लोक: Adrishyam grihatri yat tu drishyameva vishwasrut. Anadinidhanam chetanam, kim tatsatyam vadaamyaham?

हिन्दी अनुवाद: द्रष्टा देखा नहीं जा सकता है लेकिन सारी सृष्टि को देखता है। न आदि न अंत, होश में, मैं कौन सा सत्य बोलता हूँ?

उत्तर: मन या चेतना।

Sanskrit Shlok का सार: श्लोक किसी ऐसी चीज का वर्णन करता है जिसे देखा नहीं जा सकता (क्योंकि मन या चेतना एक भौतिक इकाई नहीं है) लेकिन जो कुछ देखा जाता है उसका अवलोकन करता है। एक निश्चित शुरुआत या अंत के बिना और चेतना का आसन होने के कारण, श्लोक इस प्रकार मन या चेतना के सत्य की बात करता है।

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