चंद्र विरोधाभास: – Sanskrit Shlok

सुक्ष्मं स्थूलतरं चेति, द्वयं रूपं विचक्षणैः।
पुराणं नवयौवनं, किं तत्सत्यं वदाम्यहम्?॥

हिंगलिश स्लोक: Suksmam sthulataram cheti, dvayam rupam vichakshanaih. Puranam navayaunam, kim tatsatyam vadaamyaham?

हिन्दी अनुवाद: सूक्ष्म और स्थूल, ज्ञानियों द्वारा दो रूपों में देखे जाते हैं। बूढ़ा फिर भी हमेशा के लिए जवान, मैं कौन सा सच बोलो?

पहेली का उत्तर: चांद।

Sanskrit Shlok का सार: श्लोक किसी ऐसी चीज का वर्णन करता है जो दो रूपों में प्रकट होती है – सूक्ष्म जब यह एक पतली अर्धचंद्र होती है और स्थूल जब यह पूर्ण चंद्रमा होती है। अपनी उम्र के बावजूद, यह रात के आकाश में हमेशा नया और युवा दिखाई देता है। इसलिए, श्लोक चंद्रमा की सच्चाई की बात करता है।

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