प्रकृति के आँचल में खेलें – Hindi Kavita

आओ चलें मिलकर वन में खेलें,
प्रकृति के आँचल में खो जाएँ।
हरा-भरा पेड़ और फूलों के मेले,
मन को भर देंगे अनुभवों के खेले।

पकड़ लो हाथ मेरे हाथों में,
चलो खेले खुद को जीवन की रचना में।
प्रकृति के संग मिलकर एक हों,
सुख-दुःख के बंधनों से छूटें।

हर एक पेड़ यह कहता है अपने आप से,
जीवन अनमोल है, खो न जाए तुमसे।
फूल जो खिल रहे हैं महक रहे हैं,
उन्हें देखकर दिल नचाए हैं।

धूप के ताप से गर्म हुई मिट्टी,
पानी की बूंदों से निकलता है नित्य।
हवा के संग लहराती है पत्तियाँ,
यहाँ मिल जाती हैं नयी ख्वाहिशें।

बह रहा है नदी का पानी धीरे-धीरे,
मछलियाँ जैसे खेल रही हैं तैर-तैरे।
देखो यहाँ प्रकृति का नटक चल रहा है,
खुशियों का खेल इसमें व्याप्त है।

अपनी अद्भुतता में खो जाओ तुम,
आओ चलें वन की यात्रा में हम।
प्रकृति की गोद में लिए जा रहीं हैं,
मस्तियों की हवा हमसे मुस्कराती हैं।

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