सौंधी धरा: एक कविता – Hindi Kavita

ये दिन बहुत सुनहरे हैं,
मनोहारी सुरभित बहारे हैं।
प्रकृति की गोद में सुख का उद्गार है,
जीवन की राह पर अपार हैं।

चिड़ियों की चहचहाहट गुनगुनाती है,
हरियाली की छाया छाती है।
धरती की गोद में फलों की बगीचा है,
मन को भरने की खुशियों का आधार है।

सूरज की किरणें नभ को छू रही हैं,
काव्य के स्वर आकर्षित कर रही हैं।
शब्दों के माध्यम से ज्ञान का प्रकाश है,
हृदय की तारों को चमकाने वाली आवाज है।

संगीत की मिठास सबको भाती है,
हर तरंग कविता में लाती है।
रंगों की बारीश खुशियों की बरसाती है,
हृदय के पुष्प सजाती है।

कविता की संगीतमयी धुन गुनगुनाती है,
भावनाओं को छू लेती है।
हर अक्षर अद्भुत विचारों का संगम है,
वाणी की शोभा बढ़ाती है।

कविता बोलती है दिल की भाषा,
सरसराती है मन की आवाज़।
विचारों की लहरों में बहती है,
संस्कृति को गोद में लेती है।

Leave a comment